शासनके लोडहीतर लोक बनल कुच्चा छै/ धीरेन्द्र प्रेमर्षि

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शासनके लोडहीतर लोक बनल कुच्चा छै
लोडहपर हाथ जकर अगबे सब लुच्चा छै

कहने छल जत्ते छै खधिया हम पाटि देब
वैषम्यक ठाढ मुदा पर्वत समुच्चा छै

वर्षा छै, कोशी आ बागमतीक बात छोडू
बमबम करैत अखन छोटको टुकुच्चा छै

दू मूहा गनगोआरि रूप छै देखौआटा
पाएत तँ छोडत नइ, गहुमन ई सुच्चा छै

झाँपितोपि रखने अछि अपन कुकुरदँत्ताके
रहब नइ भ्रममे जे लोक ई दँतुच्चा छै

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