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भोजपुरी

गाँव मन पर गइल/ गोपाल अश्क

गाँव मन पर गइल
आँख बा भर गइल

ठाँव आपन गइल
किस्मतो जर गइल

ठन गइल रात मेँ
भोर तर-झर गइल

देखते - देखते
जिन्दगी मर गइल

भर नजर देख लीँ
'अश्क' बेघर भइल

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हम त मुखिया बानी भइया

हम त मुखिया बानी भइया सबसे इमानदार

विधवा निर्वल के करी भलाई चाहे चुए पसेना
पर उपकार के पथ से भइया पीछे कभी हटिना
अइसन हृदय के उदार भइया सबसे इमानदार

हम त मुिखया ...

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जिन्दगी के बात पर जिन्दगी लुटाइने

जिन्दगी के बात पर जिन्दगी लुटाइने
हम इहाँ बहार के गीत गुनगुनाइने

रात-रात भर इहाँ हो रहल हिसाब बा
के जिती हिसाब से भोर के बताइने

का करी सुनाइ के मौत के गजल समय
हम त रोज मौत से आँख ही लडा़इने

'अश्क' से रहल कहाँ जाइ सुनके दरद
ऊ त आँख फोड़ ली हर घडी़ लजाइने

(बहरे हजज मुसम्मन अशतर मक्बूज)

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