मैिथली साहित्यके विकासमे ऐतिहासिक कदम

- जितेन्द्र सहयोगी

मैिथली भाषा, साहित्यके विकासमे योगदान करनिहार लौकनिके पुरस्कृत कर मैिथली भाषाक महाकवि विद्यापति पुरस्कार गुठी स्थापनार्थ अक्षयकोषके लेल नेपाल सरकारके तरफ सँ एक कराडे रकम विनियोजन केलक समाचार प्रसारण होइते गैरमैथिली भाषाके सिद्धहस्त व्यक्ति सभके दिमाग कुमहारक चक्र जका घुिमरहल अछि, हुन्का सभके घुर्मी लागिरहल अछि । सकारात्मक, रचनात्मक विचारहरू जन्मौनिहार दिल आ दिमाग सभमे ग्रहण लागि गेल अछि । जे बहुत बिडम्बना, आ दुखद यथार्थ अछि ।

किछ दिनसँ मेिडयामे दखे रहल अछि हुन्का सभके प्रतिक्रिया । एहेन प्रतिक्रिया कियाक आबि रहल अछि, बुझि नई पाइव सकैत अछी । आखिर ई प्रश्नके उत्तर के कोनाक देत ?

ई बजटे भाषण नेपाली भाषा साहित्यक लेल थप कोनो बजेट बिशेष रुप सँ नहि छटुयाओल गेल अछि । नेपाली भाषा नेपालके एकटा प्रमुख राष्ट्रभाषा अछि । ई बात सर्वविद्धिते अछि की अखनधरि ई भाषाके एकाधिकार सगरो अछि । मुदा नेपाल सरकार दिशसँ अई बेरक बजेट भाषणमे मैि थली भाषा, साहित्यके विकास, सम्बधर्न , सरंक्षण आ प्रवर्धनमे रकम छुटयाओल गेलाक बादमे गैरमैथिली साहित्यकार, रंगकर्मी, भाषाविद,् संस्कृतिविद,् संगीतकर्मी, कलाकर्मी सभके कञ्चट धिप लागल अछि। जकरा स्वभाविक मानल नहि जेबाक चाही ।

एकेटा मात्र भाषा मैिथलीके विकासक लेल सरकार अतके रकम छटुयाबक नहि चाही, दोसर भाषके सौतिन नहि मानबाक चाही, सरकारक ई रवैयाके खिलाप उतर परतै कहिक संचार माध्यमसँ अपन अमृतवाणी सभ फिजारहल अछि । मुदा ओ सभ ई बात बिसरि गेल अछि जे अखनतक नेपालके नेपाली भाषा बाहेक सभ भाषाके सौतीनके धियापुताके जका व्यवहार करतै छल । अखनतक नेपाली भाषाके मात्र सरकार अपन कोरामे राखिक चलतै छल आ दुध भात खियाबै छल । मुदा ई बेरक सरकार अए रबैयाके तोडिक दोसर भाषा सभप्रति बहुत न्याय केने अछि । कार्लमाक्सके शब्दमे कहीत बुर्जुवा संस्कारके सिसा टुिटगेल अछि ।

मुदा एकर ई अर्थ कहियो नहि लागे कि नेपालमे बाजल जाइत सभ भाषा, साहित्यके योगदान करनिहार सजर्क सभके सरकार नहि देखे । मैथिली मात्र किया? सब भाषाके दखेबाक जरुरी भगेल अछि । सरकारके मैिथली जका नेवार, भोजपुरी, अवधि, धिमाल, तामाङ आदि सभ भाषाके विकासार्थ विशेष बजेट सहित कार्यक्रम आ कार्यनीति लाबबाक काम एकदम जरुरी सेहो भगेल अछि । नहि त खतराके संकेत दिख सकैय।

वास्तविकता ई सोहो अछि, सरकारके नजर मैिथली भाषाके लेल मात्र बजटे विनियाजे न करबला बातमे सरकार दिश सँ त्रुटी सेहो अछि। मुदा अतेक बहुत निराश होबके कोनो जरुरी सहो नहि छय। इतिहासके पाना कनिको उन्टाक जँ देखी त एक बहुत निक काम सरकारके लाइग सकैय ।

सत्यके आत्मसाथ जखन करब तखन कोनो भाषी होइतो ओ कहताह कि मैथिली भाषाके साहित्यमे सरकारके आँखि परनाइ एकदम न्यायोचित अछि, जायज अछि । जे नजर अखन नहि बहुत बर्ष पहिन्हे परबाक चाही, से अई बेरक बजेटमे परल ।

अइबेरके २२ दलीय सरकारके अर्थमन्त्री बजेटमे बजेटके सामाजिक आ सांस्कृतिक शीर्षकमे कहल गेल अछि, सब जाति र जनजातिक भाषा, साहित्य, कला, संगीत आ संस्कृितके संरक्षण, सम्बद्धर्न , प्रदर्शन केल जते ।

ओही शिर्षकमे मैथिली भाषा साहित्यके विकासमे महत्वपूर्ण योगदान देिनहार व्यक्ति सभके पुरस्कार दिय महाकवि विद्यापति पुरस्कार गठुी स्थापनाकर अक्षयकोषके लेल एक करोड रुपैया विनियोजन केने अछि, जे सम्पूर्ण मिथिलावासी सभके लेल एकदम सुखद समाचार बनल गेल अछि ।

नेपाल सरकारके इतिहासे मे मैिथली भाषा, साहित्यके विकासके लेल केल गेल ई पहिल आ प्रशंसनीय कार्य अछि। अए सँ पूर्व कुनो सरकार चाहे ओ राणाकालिन हो, आ राजाकालीन हो या हो प्रजातन्त्र के आ लाके तन्त्र के हो। करिब साढे दुई सय बर्ष पहिन्हे सँ शाहकालिन इतिहास लिखके सुरुवात सँ अखनतकमे सायद ई एहन कार्य भेल अछि । अए कार्यके एक मैथिली भाषी, मैथिली भाषा साहित्यके बिद्यार्थीके हैसियत सँ हम अए सरकारके ई साचे के बहुत बहुत धन्यवाद दबे चाहबनि ।

ई ध्रुवसत्य बात अछि कि कला, भाषा, साहित्य आ संस्कृति दशे के राष्ट्रिय धरोहर अछि, राष्ट्रके गहना अछि, दशे नामक किताबके पहिल पृष्ठ अछि । देशके मेरुदण्ड आर्थिक क्षेत्र भेलो सँ ई रचनात्मक क्षत्रे सभके महत्व आथिर्क क्षत्रे सँ कम कहियो नहि रहलै । दशे क अनुहार स्पष्ट देखाबबला काम कुनो भी देशके भाषा साहित्ये सबसँ पहिने करतै आबि रहल छै ।

अतः एहन क्षत्रे मे सरकारके ययोथित मात्रामे लगानी नहि करे त दशे क अर्थतन्त्रो धरायशी बनि सकै छै । साहित्य, कला, संस्कृति, संगीत, दशे के कनु अगं आ क्षत्रे से सम्बन्ध जडु ल नहि छै । हरके अगं से अन्नयोश्रित सम्बन्ध रहै छै भाषा, साहित्यके । चाहे ओ क्षेत्र राजनैतिक, आर्थिक, सांस्कृति, सामाजिक, कानुनी, आदि कोनो क्षेत्र रहे । अतः दोसर क्षत्रे मे कतबो लगानी करितो बालुमे पानी ढारे सरह होतै मुदा भाषा, साहित्य, संगीत, कला, संस्कृति, खेल आदि रचनात्मक क्षत्रेमे जँ लगानी नहि करे त देशक काला संस्कृतिमे सिधे पइर सकैय ।

एकटा साहित्य केवल मनोरंजके लेल नहि लिखाइ छै, एकटा चित्र केवल भित्ता सजाबके लेल नहि रगं भराइ छै, एकटा अभिनय केवल दिखाबीके लेल नहि खेलल जाइ छै, एकटा गीत केवल समय कटाब मात्र नहि गाबल जाइ छै । एकर भितरमे बहुत सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैितक, नैितक, शैिक्षक, स्वास्थ्य, राष्ट्रिय सहित भावनात्मक तत्व सभ अमिट वनिक समाहित भेल रहै छै । अए क्षेत्रक उपक्षाके अर्थ भुक खानाके बराबर मानल जाइ छै ।तखन पेट के कि हाल होतै ? आदमी केहन हाल होतै ?

नेपालमे बहुत भाषाक साहित्य सभ प्रत्यक्ष, आ परोक्ष रुपमे योगदान करै रहल सत्य सबके आगा रौद सन स्पष्ट अछि । नेपाली भाषाके बादमे सायद दोसर स्थान मैिथली भाषाक रुपमे दले जाइत अछि । जनसंख्याके हिसाबसँ सेहो मैिथली भाषी सभ दोसर स्थानमे अछि । मुदा भाषा साहित्यके विकासके दृष्टिकोण सँ देखल जाइ त नेपाली भाषा साहित्यके सेहो मैथिली भाषा ठारेठारे चित्त क क गिरादेतै ।

नेपाली भाषाके साहित्यक जनम होबसँ पहिन्हि मैिथली भाषाक साहित्य अपन प्रभुत्व जमादेने छल । अए बात कोइ काटि नहि सकत । साहित्यके विकास, विस्तार, प्रवर्धन पक्षके देखल जाइ त नेपाली भाषाके साहित्य सँ बहुत जेठ अछि मैिथली भाषाके साहित्य । आवर कही त नेपाली भाषा साहित्यके बाप, बाबा, परबाबा सेहो कहल जा सकैछै । ई बात दारु पिक कोइ दरुपिबा नहि कहि रहल अछि । ई सत्य इतिहासके सुनहरी अक्षर बता रहल अछि ।

नेपाली भाषा साहित्यके विकास भेलाक दिन बेसी भेलो नहि छै । मैिथली भाषा साहित्यके विकास भेलो बाह्र तेह्र सताब्दी भगेल अछि । करिब दु सो साइठ बरिस पहिने नेपाली साहित्यके विकास भेल प्रमाण सभ भेटैत अछि जखन मैिथली भाषा साहित्यके विकास त दोब्बर मात्र नहि, तेब्बर मात्र नहि, पाँचबर सँ बेसी बरिस पहिन्हि भले प्रमाण इतिहासके किताब सभमे समाविष्ट अछि । मैथिली साहित्यके आदिकाल इ. सं. ८०० सँ १३०० मानल जाइत अछि । संस्कृत के महाकवि कालिदास सेहो एक मैिथल छेलाह, सत्य बुिझते त ई बातके प्रमाण पर्याप्त भगेल होत । आव हुन्कर विक्रमोर्वशीय नाटक चतुर्थ अंकक एकटा दोहा अए बातके जीबतिजागति प्रमाण अछि की मैथिली भाषा तात्कालीन समयमे प्रचलनमे चलिआएल छल । नेपाली सँ मैथिली भाषाके साहित्य जठे होभाक कारण एकटा योहो अछि की मिथिलाक्षेत्र नेपालमे मात्र नहि भक भारतमे सेहो परैत अछि ।

मुदा दुखक बात ई अछि कि एहन गरिमामय इतिहास मैिथली भाषाके साहित्य हाल किछ साल आबिक पिछडि गेल अछि। भारतमे हिन्दी आ नेपालमे नेपाली भाषाके जहिया सँ राष्ट्रभाषाके स्थान देबके घोषणा भेल, तहियासँ मैिथली भाषाके प्रगति जए अनुपातमे होइ त छल, हेबाक चाही, से अनुपात सँ बहुत बहुत कम भगेल अछि । मुदा ई बजटे क रकम विनियाजे नके बाद मैिथली साहित्य सारा साहित्यकाशमे उर्जा प्रदान क सके, ई आशा करी ।

अई कारण सँ सेहो मैिथली भाषा, साहित्य, कला, संस्कृतिके संरक्षण, विकास करबाक एकदमजरुरी भगेल छल ।मैथिली भाषा, साहित्यमे मरिमरिक आधा पेट खाक काम करनिहार स्रष्टा सभके ई बजेट हौसला सेहो बढाबमे सहयोगी भूिमका निर्वाह कइर सकैय ।

मैिथली भाषिक, सांस्कृितक महत्व अई बरेक सरकार किछ मात्रामे बुिझ रहल जका दखे रहल अछि । आब बजेटके लागू कुन धरी होत? ई देखके बाँकी अछि । कहीँ बानरके हात नारीयर जका नहि भजाय । आसा करी सकारात्मक रहे ।

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