जिन्दगी के बात पर जिन्दगी लुटाइने

जिन्दगी के बात पर जिन्दगी लुटाइने
हम इहाँ बहार के गीत गुनगुनाइने

रात-रात भर इहाँ हो रहल हिसाब बा
के जिती हिसाब से भोर के बताइने

का करी सुनाइ के मौत के गजल समय
हम त रोज मौत से आँख ही लडा़इने

'अश्क' से रहल कहाँ जाइ सुनके दरद
ऊ त आँख फोड़ ली हर घडी़ लजाइने

(बहरे हजज मुसम्मन अशतर मक्बूज)

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